आजकल कई कंपनियाँ अपने शेयर वापस खरीदने (Share Buyback) लगी हैं। यह निवेशकों को फायदा पहुँचाने का एक लोकप्रिय तरीका बन गया है। लेकिन इसी के साथ सरकार ने एक खास टैक्स लागू किया है, जिसे बायबैक टैक्स (Buyback Tax) कहा जाता है।
कई निवेशकों और बिज़नेस ओनर्स के लिए यह विषय थोड़ा तकनीकी लगता है।
तो आइए आसान भाषा में समझते हैं —
बायबैक टैक्स क्या है, क्यों लगाया गया है, और इसका कंपनियों व निवेशकों पर क्या असर पड़ता है?
बायबैक टैक्स क्या होता है?
जब कोई कंपनी अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदती है, तो उसे उस पर जो टैक्स देना पड़ता है, उसे बायबैक टैक्स कहते हैं।
आमतौर पर कंपनियाँ अपने मुनाफे को शेयरधारकों में बाँटने के लिए दो तरीके अपनाती हैं:
डिविडेंड देना
शेयर बायबैक करना
शेयर बायबैक में कंपनी अपने शेयर खरीद लेती है, जिससे बाजार में शेयरों की संख्या कम हो जाती है और प्रति शेयर कमाई (EPS) बढ़ सकती है।
सरकार ने यह देखा कि कई कंपनियाँ डिविडेंड देने की बजाय बायबैक कर रही थीं क्योंकि इसमें टैक्स कम लगता था। इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए बायबैक टैक्स लाया गया।
भारत में बायबैक टैक्स 20% (साथ में सरचार्ज और सेस) होता है और यह कंपनी को देना पड़ता है, निवेशक को नहीं।
बायबैक टैक्स क्यों लाया गया?
पहले डिविडेंड पर शेयरधारकों को टैक्स देना पड़ता था। इसलिए कंपनियाँ बायबैक को प्राथमिकता देने लगीं।
इससे:
कंपनियाँ डिविडेंड टैक्स से बचने लगीं
निवेशकों को टैक्स में फायदा हुआ
सरकार की टैक्स आय कम हो गई
इस असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार ने बायबैक टैक्स लागू किया।
मुख्य उद्देश्य था:
👉 डिविडेंड और बायबैक – दोनों पर बराबर टैक्स व्यवस्था बनाना।
बायबैक टैक्स कैसे काम करता है?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए किसी कंपनी ने ₹100 करोड़ के शेयर वापस खरीदे।
ये शेयर पहले ₹60 करोड़ में जारी किए गए थे।
तो कंपनी की डिस्ट्रिब्यूटेड इनकम होगी:
₹100 करोड़ – ₹60 करोड़ = ₹40 करोड़
अब इस ₹40 करोड़ पर 20% टैक्स लगेगा:
20% of ₹40 करोड़ = ₹8 करोड़ (इसके अलावा सरचार्ज और सेस)
यह ₹8 करोड़ कंपनी सरकार को देती है।
निवेशक को मिलने वाली रकम पर आमतौर पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता।
बायबैक टैक्स कौन देता है?
यह बहुत जरूरी बात है:
✅ बायबैक टैक्स कंपनी देती है
❌ निवेशक को इस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता (भारतीय नियमों के अनुसार)
यानी निवेशक को पैसा टैक्स-फ्री मिलता है, लेकिन कंपनी को टैक्स का बोझ उठाना पड़ता है।
किन कंपनियों पर लागू होता है?
बायबैक टैक्स लागू होता है:
लिस्टेड कंपनियों पर
अनलिस्टेड कंपनियों पर
भारत में 5 जुलाई 2019 के बाद घोषित किए गए बायबैक पर यह नियम लागू है (बाद में इसमें और बदलाव भी हुए हैं)।
टैक्स होने के बावजूद कंपनियाँ बायबैक क्यों करती हैं?
इसके कई कारण हैं:
1. शेयरधारकों की वैल्यू बढ़ाने के लिए
शेयर कम होने से EPS बढ़ता है और शेयर प्राइस को सपोर्ट मिलता है।
2. अतिरिक्त कैश का इस्तेमाल
जिन कंपनियों के पास ज्यादा पैसा होता है, वे बायबैक से उसे वापस निवेशकों को देती हैं।
3. कंपनी का आत्मविश्वास दिखाने के लिए
बायबैक बताता है कि मैनेजमेंट को अपने शेयर की कीमत पर भरोसा है।
4. डिविडेंड का विकल्प
डिविडेंड की तुलना में बायबैक ज्यादा लचीला होता है।
निवेशकों पर बायबैक टैक्स का असर
फायदे
निवेशकों को सीधे टैक्स नहीं देना पड़ता
प्रक्रिया आसान और साफ है
शेयर प्राइस को सपोर्ट मिल सकता है
नुकसान
कंपनियाँ बायबैक कम कर सकती हैं
बाजार में बायबैक के मौके घट सकते हैं
कुछ कंपनियाँ फिर से डिविडेंड देना शुरू कर सकती हैं
कुल मिलाकर, निवेशक टैक्स सीधे नहीं देते, लेकिन इसका असर कंपनी की रणनीति पर पड़ता है।
बायबैक टैक्स और डिविडेंड टैक्स में अंतर
| बिंदु | बायबैक टैक्स | डिविडेंड टैक्स |
|---|---|---|
| टैक्स कौन देता है | कंपनी | निवेशक |
| टैक्स दर | लगभग 20% | निवेशक की स्लैब के अनुसार |
| कब लगता है | शेयर बायबैक पर | डिविडेंड मिलने पर |
| निवेशक पर असर | आमतौर पर टैक्स-फ्री | टैक्सेबल इनकम |
अंतरराष्ट्रीय स्थिति
भारत ही नहीं, अमेरिका जैसे कई देशों ने भी हाल के वर्षों में बायबैक टैक्स लागू किया है। सरकारें चाहती हैं कि कंपनियाँ मुनाफा बाँटते समय उचित टैक्स दें।
दुनिया भर में शेयर बायबैक पर नियम धीरे-धीरे सख्त हो रहे हैं।
मुख्य बातें संक्षेप में
बायबैक टैक्स शेयर वापस खरीदने पर लगता है
यह टैक्स कंपनी देती है, निवेशक नहीं
इसे डिविडेंड के बराबर टैक्स व्यवस्था बनाने के लिए लाया गया
निवेशकों को आमतौर पर टैक्स-फ्री पैसा मिलता है
फिर भी यह कंपनी के फैसलों को प्रभावित करता है
अंतिम विचार
बायबैक टैक्स सुनने में जटिल लगता है, लेकिन इसका मकसद साफ है —
न्यायसंगत टैक्स व्यवस्था बनाना और कंपनियों को संतुलित फैसले लेने के लिए प्रेरित करना।
निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे बायबैक टैक्स को समझें ताकि सही निवेश निर्णय ले सकें।

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