भारत के तेजी से बढ़ते महानगरों और टियर-1 शहरों में घर या फ्लैट खरीदना केवल सपना नहीं, बल्कि निवेश का एक जरिया भी है। कई गृहस्वामी ऐसा सोचकर संपत्ति खरीदते हैं कि उन्हें हर महीने किराए के रूप में अतिरिक्त आय मिल सके। लेकिन इस प्रक्रिया में कई कानूनी सवाल उठते हैं: अगर आपने अपना फ्लैट किराए पर दिया है, तो क्या आप अभी भी भारतीय कानून के तहत “ग्राहक” माने जाएंगे? क्या बिल्डर यह दावा कर सकते हैं कि आपकी खरीद व्यवसायिक उद्देश्य से हुई है और इसलिए आप उपभोक्ता संरक्षण का लाभ नहीं ले सकते? हाल ही में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस महत्वपूर्ण सवाल पर फैसला सुनाकर लाखों घर खरीददारों के लिए राहत प्रदान की है। संदर्भ: संपत्ति खरीदना बनाम किराए पर देना शहरी निवासियों के लिए फ्लैट या अपार्टमेंट में निवेश का उद्देश्य अक्सर दोहरा होता है: एक तो अपना घर होना और दूसरा, किराए से आय प्राप्त करना। हालांकि, कुछ बिल्डर यह तर्क देते रहे हैं कि अगर फ्लैट किराए पर दिया गया है, तो खरीदार अब “ग्राहक” नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि ऐसी खरीदारी का मुख्य उद्देश्य व्यवसायिक है और इसलिए खरीदार को उपभोक्ता संरक्षण...