भारत में गर्मी लगातार खतरनाक होती जा रही है। मौसम विभाग ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में भीषण हीटवेव की चेतावनी जारी की है। तेज धूप, गर्म हवाएं और रात में भी कम न होने वाला तापमान अब लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि हीटस्ट्रोक अब केवल गर्मी लगने की सामान्य समस्या नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से बढ़ता हुआ पब्लिक हेल्थ रिस्क बनता जा रहा है।
सबसे चिंता की बात यह है कि हीटस्ट्रोक अचानक नहीं होता। शरीर इसके पहले कई संकेत देता है, लेकिन अधिकतर लोग इन्हें सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक स्थिति गंभीर होती है, तब तक शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं।
हीटस्ट्रोक क्या होता है?
हीटस्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर अपना तापमान नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है। सामान्य तौर पर हमारा शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है। पसीना त्वचा से बाहर निकलकर वाष्पित होता है और शरीर का तापमान कम करता है।
लेकिन अत्यधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन और ज्यादा नमी वाली परिस्थितियों में यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती। शरीर तेजी से गर्म होने लगता है और तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। इसका असर सबसे पहले दिमाग, दिल और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।
अगर समय रहते इलाज न मिले, तो हीटस्ट्रोक बेहोशी, अंगों के फेल होने और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार भारत में बदलते जलवायु पैटर्न हीटवेव को और खतरनाक बना रहे हैं। पहले जहां रात के समय तापमान कम हो जाता था, अब कई शहरों में रातें भी असामान्य रूप से गर्म रहने लगी हैं।
इस वजह से शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का मौका नहीं मिल पाता। लगातार गर्मी में रहने से शरीर में थकान, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी और दिल पर दबाव बढ़ने लगता है।
नमी यानी ह्यूमिडिटी भी एक बड़ा खतरा है। ज्यादा नमी होने पर पसीना आसानी से सूख नहीं पाता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। बाहर से व्यक्ति सामान्य दिख सकता है, लेकिन अंदर शरीर का तापमान लगातार बढ़ रहा होता है।
हीटस्ट्रोक के शुरुआती संकेत जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं
डॉक्टरों का कहना है कि शरीर गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले कई चेतावनी संकेत देता है। इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।
लगातार सिरदर्द और चक्कर आना
गर्मी में बार-बार सिरदर्द होना केवल थकान नहीं हो सकता। शरीर में पानी की कमी होने पर दिमाग तक ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जिससे चक्कर आने लगते हैं।
अत्यधिक कमजोरी और थकान
अगर थोड़ी सी गतिविधि के बाद भी शरीर बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस करे, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर गर्मी से लड़ने में अपनी ऊर्जा खो रहा है।
मतली और भूख न लगना
हीट स्ट्रेस का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। उल्टी जैसा महसूस होना, जी मिचलाना या भूख खत्म हो जाना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
मांसपेशियों में ऐंठन
पैरों, पेट या हाथों में दर्दनाक क्रैम्प्स होना शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी का संकेत है। ज्यादा पसीना निकलने से शरीर से जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं।
ज्यादा पसीना आना और फिर त्वचा का सूखा हो जाना
शुरुआत में शरीर बहुत ज्यादा पसीना निकालता है, लेकिन गंभीर स्थिति में पसीना आना बंद हो सकता है। त्वचा गर्म और सूखी महसूस होने लगे तो यह बेहद खतरनाक संकेत है।
भ्रम, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी
जब गर्मी का असर दिमाग पर पड़ने लगता है, तो व्यक्ति भ्रमित महसूस कर सकता है। बातों में उलझन, गुस्सा, चिड़चिड़ापन या ध्यान केंद्रित न कर पाना गंभीर चेतावनी संकेत हैं।
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है?
कुछ लोगों में हीटस्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा होता है।
बुजुर्ग लोग
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। कई बुजुर्ग पहले से बीमारियों और दवाइयों के कारण ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
बाहर काम करने वाले लोग
मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस, डिलीवरी स्टाफ और निर्माण कार्य में लगे लोग लंबे समय तक धूप में रहने के कारण ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
बच्चे
बच्चों का शरीर तेजी से डिहाइड्रेट होता है और वे समय पर लक्षण पहचान नहीं पाते।
हार्ट, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज
इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों का शरीर पहले से तनाव में होता है, इसलिए गर्मी का असर ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
जिनके घरों में कूलिंग सिस्टम नहीं है
ऐसे लोग जो बिना पंखे, कूलर या अच्छी वेंटिलेशन के रहते हैं, खासकर गर्म रातों में ज्यादा जोखिम में होते हैं।
शरीर के अंदर क्या होता है?
जब शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो कई अंग एक साथ प्रभावित होने लगते हैं।
दिमाग सबसे पहले प्रभावित होता है, जिससे भ्रम, बेहोशी और दौरे पड़ सकते हैं। दिल को शरीर में खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
किडनी में पानी की कमी होने लगती है और वे शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने में असफल हो सकती हैं। गंभीर मामलों में किडनी फेलियर तक हो सकता है।
अगर समय रहते शरीर को ठंडा न किया जाए, तो शरीर की कोशिकाएं और प्रोटीन टूटने लगते हैं, जिससे अंगों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
हीटस्ट्रोक से बचने के आसान तरीके
डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सावधानी से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नियमित पानी पिएं
प्यास लगने का इंतजार न करें। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें।
ORS और इलेक्ट्रोलाइट्स लें
गर्मी में शरीर से जरूरी नमक और मिनरल्स निकल जाते हैं, जिन्हें ORS या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स से पूरा किया जा सकता है।
दोपहर में बाहर निकलने से बचें
सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप सबसे खतरनाक होती है।
हल्के और ढीले कपड़े पहनें
सूती और हल्के रंग के कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।
सिर ढककर बाहर निकलें
टोपी, गमछा या छाता धूप से बचाव में मदद करता है।
चाय और कॉफी कम करें
ज्यादा कैफीन शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है।
तूफान और बिजली गिरने के दौरान घर के अंदर रहें
अचानक मौसम बदलने पर नमी बढ़ सकती है और बिजली कटने से गर्मी और खतरनाक हो सकती है।
समय पर पहचान बचा सकती है जान
डॉक्टरों का कहना है कि हीटस्ट्रोक से मौत का सबसे बड़ा कारण लक्षणों को नजरअंदाज करना है। अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार, भ्रम, बेहोशी, तेजी से धड़कता दिल या पसीना बंद होने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है।
मरीज को छांव में लाना, ठंडा पानी डालना, पंखा चलाना या बर्फ की पट्टियां लगाना शुरुआती मदद के तौर पर जीवन बचा सकता है।
भारत में बढ़ती गर्मी और लंबे हीटवेव के दौर को देखते हुए जागरूकता अब बेहद जरूरी हो गई है। शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना और समय रहते कदम उठाना ही हीटस्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थिति से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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