घर, फ्लैट या जमीन खरीदना अपने आप में एक बड़ी प्रक्रिया है। अगर प्रॉपर्टी किसी अनिवासी भारतीय (NRI) से खरीदी जा रही हो, तो टैक्स से जुड़े नियमों के कारण यह प्रक्रिया और भी जटिल हो सकती है। अब ऐसे ही खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।
1 अक्टूबर 2026 से पात्र निवासी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), NRI से अचल संपत्ति खरीदने पर कुछ TDS रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं के लिए अपने PAN का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अलग से TAN यानी Tax Deduction and Collection Account Number लेने की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना बेहद महत्वपूर्ण है। TAN की जरूरत खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि TDS की जिम्मेदारी खत्म हो गई है। खरीदार को लागू नियमों के अनुसार TDS काटना, जमा करना और उसकी सही रिपोर्टिंग करना अभी भी जरूरी होगा।
1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?
1 अक्टूबर 2026 से पहले लागू व्यवस्था के तहत, अगर कोई निवासी व्यक्ति या HUF किसी NRI से प्रॉपर्टी खरीदता था, तो संबंधित TDS प्रक्रिया के लिए TAN की जरूरत पड़ सकती थी।
किसी व्यक्ति के लिए, जो सिर्फ एक घर या जमीन खरीद रहा है, केवल इस एक लेनदेन के लिए अलग TAN लेना अतिरिक्त कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक बोझ बन सकता था।
अब CBDT ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है। 1 अक्टूबर 2026 से पात्र निवासी व्यक्ति और HUF संबंधित TDS रिपोर्टिंग के लिए TAN की जगह अपने PAN का इस्तेमाल कर सकेंगे।
यह बदलाव Income-tax Act, 2025 की Section 393(2) के तहत आने वाले कुछ भुगतानों से संबंधित है।
आसान भाषा में समझें तो सरकार ने पात्र खरीदारों के लिए TDS रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की है, लेकिन टैक्स से जुड़ी मूल जिम्मेदारी पहले जैसी ही रहेगी।
प्रॉपर्टी खरीदार के लिए इसका क्या मतलब है?
मान लीजिए आप भारत में रहने वाले व्यक्ति हैं और किसी NRI से घर या जमीन खरीद रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था में TDS से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए आपको TAN लेने की जरूरत पड़ सकती थी। इसका मतलब था कि प्रॉपर्टी खरीदने के अलावा एक अतिरिक्त टैक्स रजिस्ट्रेशन और कागजी प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती थी।
अब 1 अक्टूबर से पात्र खरीदार निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने PAN के माध्यम से TDS की रिपोर्टिंग कर सकेंगे।
यह खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो पहली बार NRI से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं और सामान्य तौर पर TAN से संबंधित किसी अन्य टैक्स प्रक्रिया में शामिल नहीं होते।
लेकिन इसे किसी प्रकार की टैक्स छूट नहीं समझना चाहिए।
TDS लागू होने पर उसे सही तरीके से काटना, जमा करना और रिपोर्ट करना अभी भी खरीदार की जिम्मेदारी होगी।
1 अक्टूबर से TDS कैसे जमा किया जाएगा?
नई व्यवस्था के तहत पात्र खरीदार Form 141 के माध्यम से TDS की जानकारी रिपोर्ट और जमा कर सकेंगे। इसे चालान-सह-स्टेटमेंट यानी challan-cum-statement के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
इसका मतलब है कि टैक्स भुगतान और संबंधित रिपोर्टिंग की जानकारी एक ही प्रक्रिया में दी जा सकेगी।
फॉर्म में लेनदेन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां देनी होंगी, जैसे:
खरीदार की जानकारी
प्रॉपर्टी की जानकारी
NRI विक्रेता की जानकारी
भुगतान की जानकारी
काटे गए TDS की जानकारी
विक्रेता का PAN
आवश्यक पूंजीगत लाभ (Capital Gain) से संबंधित जानकारी
इस प्रक्रिया में विक्रेता का PAN बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले खरीदार को विक्रेता का सही PAN और उसकी टैक्स रेजिडेंसी स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
आम आदमी को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा कागजी और प्रशासनिक प्रक्रिया कम होना है।
मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने इस्तेमाल के लिए घर खरीद रहा है और विक्रेता NRI है। ऐसे में सिर्फ इस एक प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन के लिए अलग TAN लेना अतिरिक्त काम हो सकता था।
नई व्यवस्था में पात्र खरीदार अपने मौजूदा PAN का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे अलग से TAN प्राप्त करने की जरूरत नहीं होगी और TDS रिपोर्टिंग प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खरीदार की टैक्स संबंधी जिम्मेदारी कम हो गई है।
खरीदार को अभी भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सही मात्रा में TDS काटा जाए, निर्धारित समय के भीतर जमा किया जाए और आवश्यक जानकारी सही तरीके से रिपोर्ट की जाए।
अगर गलत रकम काटी गई या TDS जमा करना भूल गए, तो सिर्फ PAN से रिपोर्टिंग की सुविधा मिलने के कारण जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी।
Capital Gain की जानकारी भी महत्वपूर्ण
NRI द्वारा प्रॉपर्टी बेचने के मामले में Capital Gain यानी पूंजीगत लाभ से जुड़ी जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
नई रिपोर्टिंग व्यवस्था में लेनदेन से संबंधित Capital Gain की प्रकृति की जानकारी देनी पड़ सकती है। इसमें यह देखना जरूरी हो सकता है कि संबंधित लाभ Long-Term Capital Gain या Short-Term Capital Gain की श्रेणी में आता है।
इसलिए NRI से प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल खरीद मूल्य और TDS पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। विक्रेता की टैक्स स्थिति और लेनदेन की प्रकृति को भी समझना जरूरी है।
जटिल मामलों में टैक्स विशेषज्ञ या चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
अगर प्रॉपर्टी के कई खरीदार हों तो क्या होगा?
अगर दो या उससे अधिक लोग मिलकर NRI से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो उन्हें इस मामले में विशेष सावधानी रखनी होगी।
संयुक्त खरीद के मामले में यह मान लेना सही नहीं होगा कि केवल एक खरीदार की रिपोर्टिंग से सभी खरीदारों की जिम्मेदारी पूरी हो जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक खरीदार को अलग रिपोर्टिंग और अलग Form 141 दाखिल करने की जरूरत हो सकती है।
इसलिए संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी खरीदने वाले सभी लोगों को अपने PAN और लेनदेन से संबंधित जरूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर तीन लोग मिलकर कोई प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो सभी तीनों खरीदारों के लिए लागू रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को अलग-अलग जांचना जरूरी होगा।
1 अक्टूबर से पहले खरीदार क्या तैयार रखें?
अगर आप NRI से घर, फ्लैट या जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो लेनदेन पूरा करने से पहले जरूरी दस्तावेज और जानकारी तैयार रखना बेहतर होगा।
इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
1. खरीदार का PAN: सभी खरीदारों के PAN की जानकारी सही होनी चाहिए।
2. विक्रेता का PAN: NRI विक्रेता का सही PAN प्राप्त करें और उसकी जानकारी जांचें।
3. विक्रेता की टैक्स रेजिडेंसी: यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता की निवासी या अनिवासी स्थिति सही तरीके से समझी गई है।
4. प्रॉपर्टी की जानकारी: प्रॉपर्टी से संबंधित जरूरी दस्तावेज और पहचान संबंधी जानकारी तैयार रखें।
5. भुगतान की जानकारी: कुल कीमत और किए जाने वाले भुगतान का सही रिकॉर्ड रखें।
6. TDS की गणना: भुगतान से पहले लागू TDS की सही गणना करें।
7. Capital Gain से जुड़ी जानकारी: आवश्यक होने पर विक्रेता के Capital Gain से संबंधित जानकारी उपलब्ध रखें।
8. संयुक्त खरीदारों की जानकारी: अगर कई लोग प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो प्रत्येक खरीदार की रिपोर्टिंग जरूरतों को समझें।
क्या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के नियम भी बदल रहे हैं?
नहीं। यह बदलाव मुख्य रूप से TDS की रिपोर्टिंग और टैक्स अनुपालन से जुड़ा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि प्रॉपर्टी की सामान्य खरीद, मालिकाना हक या रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बदल गई है।
खरीदार को Sale Agreement, भुगतान, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और प्रॉपर्टी से जुड़े अन्य लागू नियमों का पालन पहले की तरह करना होगा।
इसलिए TDS की नई व्यवस्था को प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के नए नियम के रूप में नहीं देखना चाहिए।
आसान हुई प्रक्रिया, लेकिन TDS की जिम्मेदारी बरकरार
1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला यह बदलाव NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वाले पात्र निवासी व्यक्तियों और HUF के लिए TDS रिपोर्टिंग प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पात्र खरीदार अलग TAN लेने के बजाय अपने PAN का इस्तेमाल कर सकेंगे।
लेकिन TDS काटने, जमा करने और सही रिपोर्टिंग करने की जिम्मेदारी बनी रहेगी।
इसलिए NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वालों को 1 अक्टूबर से पहले विक्रेता का PAN, टैक्स रेजिडेंसी, प्रॉपर्टी और भुगतान से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए।
सीधे शब्दों में कहें तो नया नियम कागजी प्रक्रिया को आसान कर सकता है, लेकिन खरीदार की TDS संबंधी जिम्मेदारी खत्म नहीं करता।

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